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General Shayari

Writer Photo Madhu Bhagat Sat 10th Sep 2016
गुस्ताखी नही वक़्त तेरे अदालत की, अश्क बढ़ते गए , तू दर्द देता गया । नही अल्फाज़ तेरे उन अस्कामो का आरज़ू बढ़ती गयी, तू खता करता गया । है एहसास नही तुझे मेरी मोह्हबत की ख़ामोशी बढ़ती गई तू खलिश देता गया ।

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