गुंडे बने कोतवाल

Writer Photo Pandit Sanjay Sharma 'aakrosh' Tue 1st Sep 2015      Write your Poem
gunde-bane-kotwal.jpg
जहाँ गुंडे बनकर कोतवाल
अपना शासन चला रहे थे
लूट डकैती हत्या कर
लोगों को दहला रहे थे
कैसे हम खुद को समझाएं
वो हमको बहला रहे थे
हमारे ही तो सामने वो
दिल पर नश्तर चला रहे थे
सपनों को अपनो के आगे
देखो धूल में मिला रहे थे
हमारे ही सीने पर चढ़कर
देखो गोली चला रहे थे
नहीं सहा जाता अब तो
हम दिल को समझा रहे थे
कैसा तांडव मचा यहाँ पर
शैतान ठहाके लगा रहे थे


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