गर्व से कहो हमारी जाति सिर्फ भारतीय है

Writer Photo Pandit Sanjay Sharma 'aakrosh' Sat 26th May 2018      Write your Article
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भारतीय राजनीति में जिस प्रकार से जाति का तड़का लगाकर समाज को बांट कर नेता अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकते आ रहे हैं उसे देशहित में कतई उचित नहीं कहा जा सकता है ।
क्या हमें अपनी पहचान बताने के लिए जातिगत वैसाखियों की आवश्यकता है ?
क्या हमारी जाति सिर्फ और सिर्फ भारतीय नहीं होनी चाहिए ?
जातिगत आधार पर हिन्दू और मुसलमान के नाम पर देश की जनता को बांटने का काम हमारे देश के नेताओं ने बखूबी अंजाम देकर अपनी सियासतरूपी दुकान को खूब चमकाया है और उसके उपरांत उनको वोटों की फसल के रूप में खूब काटा भी है ।
जब हम भारतीय अपने अपने घरों में चैन की नींद सो रहे होते हैं तब भारत देश का जवान रात दिन जागकर सीमा पर हर खतरे का सामना करके हमारे देश की सीमा की हिफाजत कर हमें चैन की नींद मुहैया कराता है
हमारे देश का जवान हमारी जाति पूछकर हमारी और हमारे देश की सीमा की हिफाजत नहीं करता वो भारत की आन वान शान और भारत में रहने वाले हर जाति और समाज के लोगों की हिफाजत करता है ।
उसी प्रकार हमारे देश का किसान जो हमारा अन्नदाता है वो भी सर्दी गर्म बरसात की परवाह न करते हुए हर जाति और मजहब के लोगों के लिए अन्न के रूप में रोटी का प्रबंध करता है ।
क्या वो किसान हमारी जाति पूछकर हमारे लिए अन्न उगाता है ?
हमारे देश के किसान के अन्न से बनी हुई रोटी चाहें हिन्दू हो चाहें मुसलमान हो या किसी भी जाति का हो हर जाति और समाज का व्यक्ति खाता है ।
जिस दिन भारत का जवान और भारत का किसान जाति और मजहब के नाम पर अपने अपने कार्यों को अंजाम देने लगेंगे तब कभी सोचा है क्या होगा हमारा ?
जब हमारे देश का जवान और किसान अपनी सेवाओं में हमसे जातिगत भेदभाव नहीं करता तो फिर हम क्यों सियासतदारों के बनाये हुए जातिगत चक्रव्यूह में फंस रहे हैं ?
क्या देश में बहने वाली हवा हमारी जाति या मजहब पूछकर बहती है ?
क्या देश में होने वाली बरसात हमारी जाति या मजहब पूछकर बरसती है ?
जब हवा और बरसात हर जाति और मजहब के लोगों में भेदभाव नहीं करती तो फिर हम क्यों नेताओं के द्वारा फैलाये गए जातिगत मकड़जाल में फंसकर रह गए हैं । मनन कीजिये ।

जिस दिन भारत में रहने वाले हिन्दू और मुस्लिम दोनों अपनी जाति हिन्दू या मुस्लिम न बताकर सिर्फ भारतीय बताने लगेंगे समाज को हिन्दू और मुसलमान या जातिगत आधार पर बांटने वाले नेताओं की दुकान बंद हो जाएगी ।
संसद में बहुत से कानून बनाये जाते हैं क्या ऐसा कोई कानून नहीं बनाया जा सकता जहाँ उसकी जाति के कॉलम में हिन्दू मुस्लिम या उसकी कोई भी जाति हो वो न लिखकर सिर्फ और सिर्फ उसकी जाति भारतीय ही लिखा जाए
जिस दिन ऐसा हो गया उस दिन से सारे जातिगत झगड़े बन्द हो जाएंगे
जातिगत आधार पर समाज को बांटने वाले नेताओं की दुकान का शटर बन्द हो जाएगा ।
क्या ऐसा सम्भव है ?
पं संजय शर्मा की कलम से


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